*विष्णुपद छंद*
1 *नारी*
कतका राखे पर्दा भीतर,तभो आज पढ़गे!
अबला सबला कबके होगे,नारी अब बढ़गे !!1!!
सार सृष्टि के रचना करथे,दाई सब कइथे !
बेटी-बेटा देथे सबला,कतको दुख सइथे !!2!!
शोषण भोगिच भोगत अबले,सृष्टि बनिच जबले !
नैन तरी तो पाथे आँसू,मान रखे तबले !!3!!
बेटी बनगे वैज्ञानिक जी,मान बढ़े सबके !
शांत्ति क्रांत्ति अउ करही गर्जन,कार रहै दबके !!4!!
पूजा झन कर देवी कइके,बेटी तो कइले !
कोख तरी मा मारच काबर,तहूँ दु:ख सइले !!5!!
मर्जाद बँचे बेटी ले जी,करथे घर सकला !
सुघ्घर संसार सजे रइथे,लूटव झन हक ला !!6!!
आज भाग के लेखा भठगे,करम खुदे लिखथे !
सबला पाठ सिखाके संगी,अपन घलो सिखथे !!7!!
2 *धूवा मारे*
(भ्रूण हत्या)
*गुरु घासीदास अमृतवाणी : एक धूवा मारे तेनो तोर बराबर आय*
धूवा मारे काबर पापी,पाबे का मन के !
बेटा मिलही ता का करबे,चलबे का तनके !!1!!
बेटी-बेटा मा भेद करे,लाज कहाँ लगही !
नाक-कान तो बेंचे बइठे,कोन भला ठगही !!2!!
नारी-नारी बर जी जलथे,मोर इही कहना !
ममता देहव तबतो दाई,सुघर संग रहना !!3!!
धूवा सँचरे लालच ठाने,मशीन मा दिखथे !
चेक कराके फाँदा डारे,पापी मन हिलथे !!4!!
डॉक्टर बनथे संगी तुँहरे,लोभ फूल खिलथे !
नियत-धरम के सौदा करथे,कोख तहाँ मिटथे !!5!!
कतको धूवा अलहन सँचरे,मया जाल फँसके !
धूवा मारव काबर संगी,आज तुमन हँसके !!6!!
नाबालिक में धूवा परगे,बोल कोन रखही !
पाप मान के फेंकैं सबतो,कुकुर खड़े भखही !!7!!
करथव काबर अइसन गलती, रोथन मर मरके !
बिनती हे तुम रोकव अलहन,जीथन डर डरके !!8!!
जेकर उजड़े कोख जान ले,हिरदे हा जरथे !
जीथे काया दिखथे सबला,अंत्तस हा मरथे !!9!!
जानौं बढ़िया बात सबो जी,गुरुजी जब रहिसे !
छोड़व अइसन पाप करम ला, सबला तब कहिसे !!10!!
बैना संस्कृति चालू करके,क्रांत्ति करदिच सगा !
सतगुरु घासी जेकर परिचय,सबला कहवँ जगा !!11!!
कोख तरी तब लइका बाँचै,धूवा बंस पलै !
पढ़े लिखे अब पापी होगैं,कोख मरघट चलै !!12!!
3 *मोखारी*
बबा लाय हे दतवन नोनी,दाँत बने घँसबो !
जीभ सीप के कुल्ला करबो,कुची फेंक हँसबो !!1!!
बनतुलसा बर बोइर बमरी,टोर लन चिरचिरा !
करंच मउहाँ सब्बो दतवन,लीम हे किरकिरा !!2!!
बमरी सोंटा के मोखारी,गाँव-गाँव चलथे !
घड़ी-घड़ी मा खेलत खावत,आज कल निकलथे !!3!!
हँसिया बाँधै डँगनी धरके,दतवन अभी मिलही !
लाम छँड़ा ला टोरै सब्बो,दाँत तभे खिलही !!4!!
नवा जमाना धरके आगे,टूथ ब्रस घँसरबे !
टूथ पेस्ट तो रइथे बढ़िया,देख तहूँ फँसबे !!5!!
मजा कहाँ जी दतवन जइसन,करू लीम बमरी !
दाई बाबू माँगत हावै,चलना जी लमरी !!6!!
बैकटेरिया मरथे नोनी,बढ़िया मुँह लगथे !
साफ दाँत तो दिखथे चकचक,बदबू हर भगथे !!7!!
सुरता बढ़थे बमरी घँसले,यहू बुता करले !
आवाज मधुर बोइर करथे,ध्यान यहू धरले !!8!!
नैन जोति तो बढ़थे बर ले, श्वेत प्रदर हँटथे !
रक्त प्रदर के नाशक होथे,केत बने मिटथे !!9!!
दतवन के अब देखव जादू, घर-घर सुख लमरे !
लाख बिमारी नाशक बनके,मेटे बर टमरे !!10!!
मूत्र रोग अउ पथरी स्वाँसा,दाँत सेंध्द हिलना !
मुँह के छाला अउ पायरिया,सबला हे मिटना !!11!!
पेट चेहरा बढ़िया सेहत,झुमरत मन करले !
कफ ब्लड प्रेशर जाही सबके,गाँठ बाँध धरले !!12!!
अइसन होथे जी मोखारी,जादू बड़ चलथे !
देश मोर तो घँसथे दतवन,केत हाँथ मलथे !!13!!
4 *पापी*
पापी सकल पाप मा फदके,देखत मन हिलथे !
नाम पान के आसा राखे,गली-गली फिरथे !!1!!
सतगुरु कइसे मिलही हमला,रोज पुछत कइथे !
हपट हपट के रेंगै रस्ता,थके थके रइथे !!2!!
बने नही सतकर्मी संगी,आज माथ पटके !
करले पहिली जइसे मनके,तोर काय अटके !!3!!
मौज मार के जिनगी काटे,काबर अब डरथे !
घाट घाट के पानी पीये, नैन तरी झुलथे !!4!!
माया फाँसे हंसा जाने,अब उपाय करले !
जपले पुरस नाम ला संगी,ज्ञान ध्यान धरले !!5!!
*5 भासा के सरिता*
गाँव गली मा खोजवँ संगी,मिलही जी मन के !
जइसन तइसन चलही जिनगी,सुनते जी जन के !!1!!
आत जात हे साँसा रोजे,मालिक के सुरती !
भार भरोसा अंत्तस राखे,करही मन पुरती !!2!!
बात बात मा हाल हलाथच,पाबे का लड़ के !
लोभ खोभ के नइहे जिनगी,रइबे का अड़ के !!3!!
काँट छाँट वो करथे रचना,जेकर हे कविता !
सबद सबद ला जोड़त रइथे,भासा के सरिता !! 4!!
काबर कइथव हमला नेता,बेटा हम घर के !
कतको जइसन नइहन हमतो,सेवा लव धरके !!5!!
घाट घाट के पानी लानैं,जाँच परख करथे !
कतको पीते-पीयत तरगैं,कतको तो डरथें !!6!!
हपट हपट के रेंगै संगी,रस्ता हे सत के !
गोल मोल हे जेकर बानी,नइहे वो गत के !!7!!
*रचनाकार : श्री असकरन दास जोगी*
मो.नं.: 9340031332
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