Friday, 20 April 2018

जोगी के आल्हा

*आल्हा छंद*

*1.खाँटी आँव छत्तीसगढ़िया*

छत्तीसगढ़ मोर महतारी,जेकर मँय तो लाल कहाँव !
खाँटी आँव छत्तीसगढ़िया,जेकर छाँव जिनगी पहाँव !!1!!

छत्तीसगढ़ी साहित साधक,गुरु निगम के चेला आँव !
खाँटी आँव छत्तीसगढ़िया,दया मया ओकर ले पाँव !!2!!

*2.सरहा जोधाई के ललकारे*

रजुआ बिट्ठल के फटकारे,बइरी थरथर काँपत जाय !
सरहा जोधइ के ललकारे,कपटी मनखे लड़ ना पाय !!1!!

धरती माता रोज दुलारे,लबरा कटकट दाँत चबाय !
पखरा कस छाती देखाथे,ठोंकत छाती आज बलाय !!2!!

तेंदू लाठी धर के चाले,पटक-पटक लेवत हुरियाय !
गमछा बाँधत हे कनिहा मा,तब्बल धरके सोर मचाय !!3!!

लागे ठेनी तो ठन जाही,दोनो डाहर बउछा जाय !
खोजे ठाउर कहाँ ले पाही,फुदकी बगरे माँत उड़ाय !!4!!

देखत मनखे भिरभिर भागे,लहू रकत के धार बहाय !
पानी माँगे नइतो पाहीं,लाठी तब्बल जबर सहाय !!5!!

होंकड़-होंकड़ मारत जाथें,जोध्दा सरहा जोधइ आँय !
तातर मेछा अँइठैं भाई,दोनो भाई बीर कहाय !!6!!

*3.बिरहा आगी लेसत हावे*

धधकत हावे हिरदे भठ्ठी,काया माया फाँस पराय !
कलप-कलप के रोथे हंसा,कइसे मुकती हाँथ धराय !!1!!

पाहो परगे मोह-मया रे,सुरती लकड़ी जरथे पोठ !
बिरहा आगी लेसत हावे,अबक तबक के कइसन गोठ !!2!!

अली-गली तो रण अस लागे,बैरी लागै जोही मोर !
नैन तीर वो धरके आथे,देखत रइथे नैना चोर !!3!!

पटर-पटर तो करथे बोली,मोह-मया के चकमक ठाँय !
अंग-अंग तो लगथे आगी,बोली फुटथे बम कस धाँय !!4!!

सुरता डोरी छाँदत हावे,बीर-धीर ले तीरत जाय !
हार-हार के बइठे पाबे,कतको जोध्दा माथ नवाय !!5!!

लाल ओंठ हे टिहकत भाई,कइसे काया अपन बचाँव !
बरसा बरसे मिलकी हाँसी,दया करा तो देख उचाँव !!6!!

गड़ी-वड़ी ले खाके धोखा,खेल मया के हार गयेवँ !
भरे पुरा हे नदिया जेमा,हाँथ गोड़ मैं मार गयेवँ !!7!!

डार-पान के नइहे थेघा,कइसे जाहूँ जोही पार !
बोहत हावै कठवा डोंगा,चलते जावै धारे धार !!8!!

उबुक-चुबुक तो होवन लागै,काल-काल के मानै बात !
घेरत हावै हमला गोखी,जिनगी होवत कारी रात !!9!!

देके धोखा कपटी साथी,आज काल तो करही मौज !
हरहर-कटकट कटही भाई,पाही ओहू नारद फौज !!10!!

*रचनाकार-श्री असकरन दास जोगी*
ग्राम-डोंड़की,तह.+पोस्ट-बिल्हा,जिला-बिलासपुर(छ.ग.)
www.anjoripakh.blogspot.com

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