Thursday, 27 February 2020

हमर महतारी भाखा-सार छन्द

*#हमर_महतारी_भाखा*(सार-छन्द)

सार हमर महतारी भाखा,बोलन आनी-बानी |
अमृत आय जी गुरु घासी के,महानदी के पानी ||1

झरझर-झरझर झरना आरो,मैना जइसे बासे |
वीर नरायन गर्जत जेमा,बैरी दुबके पासे ||2

ठिनठिन-ठिनठिन बाजत भाखा,जगदलपुर कस लोहा |
ननपन के खखवावत गुस्सा,धरे हाथ के कोहा ||3

सुनव पिरोहिल के हाँसी जी,गली-गली के चारी |
लइका के किलकारी जानौ,आय बबा के गारी ||4

दरद ददरिया हमरे भाखा,करमा पंथी वाले |
बाँसगीत मा नाचै लोरिक,सुग्घर कलगी डाले ||5

ममता पाबे महतारी के,दया मया के कोरा |
छत्तीसगढ़ी गुरतुर बानी,जेहर सुख के पोरा ||6

ठेठ पंडवानी तीजन के,गेंड़ी रचपिच रइया |
दाउ मंदराजी के नाचा,भाखा अइसन दइया ||7

भरथरी तान मनभर गावै,जब खड़े सुरुज बाई |
रोवत लइका खेलन लागै,अन्तस भाखा दाई ||8

मस्तुरिहा के साहित सागर,छत्तीसगढ़ी पढ़लौ|
अब जागव-जागव संगी रे,भाग अपन तुम गढ़लौ ||9

चलन तान के जब्बर छाती,अइसन हमरे भाषा |
जन-जन के बल तारन तरनी,जिनगी के परिभाषा ||10

*#असकरन_दास_जोगी*

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