*#हमर_महतारी_भाखा*(सार-छन्द)
सार हमर महतारी भाखा,बोलन आनी-बानी |
अमृत आय जी गुरु घासी के,महानदी के पानी ||1
झरझर-झरझर झरना आरो,मैना जइसे बासे |
वीर नरायन गर्जत जेमा,बैरी दुबके पासे ||2
ठिनठिन-ठिनठिन बाजत भाखा,जगदलपुर कस लोहा |
ननपन के खखवावत गुस्सा,धरे हाथ के कोहा ||3
सुनव पिरोहिल के हाँसी जी,गली-गली के चारी |
लइका के किलकारी जानौ,आय बबा के गारी ||4
दरद ददरिया हमरे भाखा,करमा पंथी वाले |
बाँसगीत मा नाचै लोरिक,सुग्घर कलगी डाले ||5
ममता पाबे महतारी के,दया मया के कोरा |
छत्तीसगढ़ी गुरतुर बानी,जेहर सुख के पोरा ||6
ठेठ पंडवानी तीजन के,गेंड़ी रचपिच रइया |
दाउ मंदराजी के नाचा,भाखा अइसन दइया ||7
भरथरी तान मनभर गावै,जब खड़े सुरुज बाई |
रोवत लइका खेलन लागै,अन्तस भाखा दाई ||8
मस्तुरिहा के साहित सागर,छत्तीसगढ़ी पढ़लौ|
अब जागव-जागव संगी रे,भाग अपन तुम गढ़लौ ||9
चलन तान के जब्बर छाती,अइसन हमरे भाषा |
जन-जन के बल तारन तरनी,जिनगी के परिभाषा ||10
*#असकरन_दास_जोगी*
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